बाल उड़ान

Hindi Monthly Magazine

जांबाज़ हीरो की कुर्बानी


स्व.कप्तान विजयंत थापर
यह एक सच्ची घटना है जो हमारे देश के वीर नौजवान ने अपने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी उसने इस बात की परवाह भी नहीं की कि उसके भी परिवार में मकोई उसका इंतेज़ार कर रहा है कि कब उसका लाल घर वापस आयगा |
यह कहानी है स्व. कप्तान विजयंत थापर की | कप्तान विजयंत थापर को सब परिवार के लॉव उनको रोबिन ही कह कर बुलाते थे, उनका जन्म १९७७ में सैनिक परिवार में ही हुआ और महज ४ की वर्ष की आयु में उन्होंने अपने पिता की सर्विस पिस्तौल को चला कर इस बात के संकेत दे दिए थे कि वह अपने पिता के ही तरह भी इस देश कि रक्षा के लिए एक वीर सिपाही बनेंगे |
विजयंत थापर की १९९८ में राजपुताना रायफल्स ग्वालियर में भर्ती हुई और कुछ दिन बाद ही उनकी पोस्टिंग कश्मीर में कर दी गयी |
कारगिल युद्ध शुरू हो गया था और विजयंत थापर को को ३ चोटियों पर कब्ज़ा करने का भर मिला 

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