बाल उड़ान

Hindi Monthly Magazine

हमने बस एक शुरुआत की है और एक कदम आगे बढ़ाया है कि कुछ प्रयास किया जाए इस पत्रिका "बाल उड़ान" के कुछ गिनती के सदस्य के माध्यम से आप सबको आमंत्रित करते है कि आप सब हमारे साथ जुड़े और कुछ नया करने का प्रयास करें क्योंकि प्रयास करने से ही कुछ होता है अन्यथा सिर्फ विचार ही होते है जिसका न कोई रूप है न अस्तित्व | किसी ने बहुत सच कहा कि जिसके जीवन में किसी तरह की परीक्षा नहीं उसका जीवन व्यर्थ है, इसिलए हमको भी अपना जीवन परीक्षा बना कर व्यतीत करना चाहिए और हमारे समाज को किसी भी तरह की छति पहुचाने वालो से इसकी सुरक्षा करनी चाहिए |
हम बाल उड़ान टीम मिल कर एक पारदर्शी कार्ये करने का संकल्प करते हैं और आपके बच्चों को इस पत्रिका के माध्यम से उनको एक राह तलाशने में मदद करेंगे | हमने ऐसी किसी भी तरह की सोच नहीं रखी हैं कि यह पत्रिका "बाल उड़ान" सिर्फ कुछ वर्ग के बच्चों तक ही सीमित रहे बल्कि यह हर वर्गके लिए हैं न ही तो हमारे लिए SPECIAL SCHOOLS  या NORMAL SCHOOLS जहाँ फॉर्मल शिक्षा दी जाती है कोई अंतर है, न किसी भी तरह का भेद भाव क्योंकि बाल अवस्था सबके के लिए एक समान है क्योंकि हमारी कोई एक कमी किसी भी बालक/बालिका का जीवन अंधकार की ओर ले जा सकती है चाहे वह कितना भी अमीर क्यों न हो क्योंकि पैसा और संस्कार दोनों ही एक दुसरे से बहुत अलग है, संस्कार पैसों से नहीं ख़रीदा जाता और जहा सिर्फ पैसा ही वास करता हो वह संस्कार नहीं मिलता यह दोनों ही अलग अलग तरह की दौलत है इंसान को एक ही तरह की दौलत प्राप्त हो सकती और यह उसी को निर्णय लेना है कि वह किस दौलत कि प्राप्ति करे ईश्वर उसको उसकी इच्छा के अनुसार उसको वैसी ही दौलत दे कर उसको प्रसन्न कर देता है, हमारे लिए यहाँ पर यह सीख है कि संस्कार वह दौलत है जो कभी समाप्त नहीं होती और सबको आसानी से बाँटी जा सकती है लेकिन पैसा ऐसी दौलत है कि कोई भी नहीं देना चाहता यह तो इस संसार का नियम है जो हम कि हम मानवो ने स्वयं ही बनाएं है ईश्वर तो मात्र दर्शक बन कर रह जाता है और सोचता है कि मैंने तो ऐसी कल्पना भी नहीं की थी कि मानव अपने स्तर से इतना नीचे गिर जायगा |
      मैं संपादक होने के नाते आप लोगों के बीच ही में बैठ कर आप सब की बातों को इस पत्रिका में समेटना चाहता हूँ क्योंकि मार्ग तो आप सब ही हैं मैं तो बस दिया ले कर निकला हूँ |
 

                                  






          






                                                

                                                                                                 


                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                       अमजद खान सरवर     

                                                                                                                                                                                        वरिष्ठ संपादक